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गोस्वामी तुलसीदास रचित श्री रामचरितमानस

Original price was: ₹795.00.Current price is: ₹695.00.

Author : Goswami Tulsidas 
ISBN : 978-93-49522-30-5
Edition : Reprint
Year : 2025
Pages : 544
Size : 14.5×21.5 Cm
Price : 795
Format : Paperback
Publishers : Global Academic Publisher & Distributors

Description

किताब के बारे में

रामचरितमानस, जिसे तुलसी—कृत रामायण या तुलसी रामायण भी कहा जाता है, एक प्रसिद्ध हिंदी ग्रंथ है, जिसे गोस्वामी तुलसीदास ने 16वीं सदी में अवधी भाषा में लिखा था । तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना रामनवमी के दिन साल 1574 में शुरू की थी । संम्पूर्ण रामचरितमानस को सात कांडों में लगभग 12,800 पंक्तियों से बना है, जो 1,073 छंदों में विभाजित है । तुलसीदास ने महाकाव्य के सात कांडों की तुलना मानसरोवर झील के पवित्र जल में जाने वाले सात चरणों से की है “जो शरीर और आत्मा को एक साथ शुद्ध करते हैं” । पहले दो भाग, बाल कांड (बचपन का प्रसंग) और अयोध्या कांड (अयोध्या प्रसंग), रचना का आध से ज्यादा हिस्सा बनाते हैं । अन्य भाग हैं अरण्य कांड (वन प्रसंग), किष्किंधा कांड (किष्किंधा प्रसंग), सुंदर कांड (सुखद प्रसंग), लंका कांड (लंका प्रसंग), और उत्तर कांड (बाद का प्रसंग) । रचना मुख्य रूप से चैपाई मीटर (चार पंक्तियों वाली चैपाई) में रची गई है, जिसे दोहा मीटर (दो पंक्तियों वाले दोहे) से अलग किया गया है, जिसमें कभी–कभी सोरठा और कई छंद मीटर भी शामिल हैं ।
रामचरितमानस का हर अध्याय मंगलाचरण से शुरू होता है । भारतीय लेखन परंपरा में यह प्रथा है कि लेखक किसी नई पुस्तक की शुरुआत देवताओं के आह्वान से करता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि संकल्प बिना किसी बाधा के पूरा हो जाए । प्रत्येक कांड के पहले तीन या चार श्लोक आम तौर पर आह्वान के रूप में होते हैं ।

लेखक के बारे में

गोस्वामी तुलसीदास जी (1511–1623) हिंदी साहित्य के महान कवि थे । आपका जन्म राजापुर जिला बाँदा (वर्तमान में चित्रकूट) में हुआ । कुछ विद्वान् आपका जन्म सोरों शूकरक्षेत्र, वर्तमान में कासगंज (एटा) उत्तर प्रदेश में हुआ मानते हैं । उनके पिता आत्माराम दुबे नाम के एक प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण थे । तुलसीदास जी की माता का नाम हुलसी था । प्रचलित जनश्रुति के अनुसार शिशु बारह महीने तक माँ के गर्भ में रहने के कारण अत्य/िाक हृष्ट पुष्ट था और उसके मुख में दाँत दिखायी दे रहे थे । जन्म लेने के साथ ही उसने राम नाम का उच्चारण किया जिससे उसका नाम रामबोला पड़ गया । श्री रामचरितमानस उनका लोकप्रिय ग्रन्थ है और इसे भारत में बड़े भक्तिभाव से पढ़ा जाता है । उनके नागरी प्रचारिणी सभा काशी द्वारा प्रकाशित ग्रन्थ इस प्रकार हैं% रामचरितमानस, रामललानहछू, वैराग्य–संदीपनी, बरवै रामायण, पार्वती–मंगल, जानकी–मंगल, रामाज्ञाप्रश्न, दोहावली, कवितावली, गीतावली, श्रीकृष्ण–गीतावली, विनय–पत्रिका, सतसई, छंदावली रामायण, कुंडलिया रामायण, राम शलाका, संकट मोचन, करखा रामायण, रोला रामायण, झूलना, छप्पय रामायण, कवित्त रामायण, कलि/ार्मा/ार्म निरूपण, हनुमान चालीसा ।

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