Description
किताब के बारे में
एम.एस. गोलवलकर द्वारा लिखित ‘बंच ऑफ थॉट्स’ (विचारों का समूह), लेखक के भाषणों, वार्ताओं, चर्चाओं और अनौपचारिक वार्तालापों का एक संग्रह है, जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला को समेटे हुए है । यह पुस्तक स्वतंत्रता संग्राम, स्वतंत्रता के बाद के विभाजन, भारत–चीन और भारत–पाकिस्तान युद्ध आदि सहित स्वतंत्रता से पहले और बाद के भारत के घरेलू राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा करती है । यह धर्म, जाति, आदिवासी कल्याण आदि जैसे सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा करती है । चर्चा का एक अन्य विषय अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य है, जैसे समाजवाद और पूंजीवाद तथा साम्यवाद और लोकतंत्र के बीच वैचारिक संघर्ष । यह पुस्तक चरित्र निर्माण (व्यक्तिगत और राष्ट्रीय दोनों) पर भी चर्चा करती है । हालाँकि, इस पुस्तक का मुख्य सार स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत की राष्ट्र–निर्माण रणनीति में निहित है । लेखक राष्ट्र–निर्माण के एक नवीन और सूक्ष्म दृष्टिकोण की बात करते हैं । यह पुस्तक लोकतंत्र (पूंजीवाद) और तानाशाही (समाजवाद/साम्यवाद) जैसे पश्चिमी विचारों की आलोचना करती है और प्राचीन भारतीय विचारधाराओं पर आधारित राष्ट्र–निर्माण की एक नई योजना प्रस्तुत करती है । यह पुस्तक राष्ट्रीय स्वतंत्रता के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है और तर्क देती है कि स्वतंत्रता आंदोलन को केवल उपनिवेश–विरोधी अभियान तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए । इस पुस्तक में, लेखक सभी ‘वादों’ के प्रति अपनी असहमति व्यक्त करते हैं और बताते हैं कि कैसे प्राचीन भारतीय विचारधारा उन ‘वादों’ की तुलना में एक सर्वसमावेशी और सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है जो अधिकांशतः किसी सामाजिक बुराई की प्रतिक्रियास्वरूप उत्पन्न हुए थे । पुस्तक ‘आर.एस.एस, उसके उद्गम, कार्यप्रणाली और इस तरह के एक सूक्ष्म और अनुशासित संगठन द्वारा भारत जैसे देश की तस्वीर बदलने के बारे में भी बात करती है । इन सबके अलावा, यह पुस्तक अपनी ‘मुस्लिम–विरोधी’ और ‘ईसाई–विरोधी’ टिप्पणियों के लिए भी जानी जाती है । लेकिन यही एक महत्वपूर्ण कारण है कि किसी को यह पुस्तक क्यों पढ़नी चाहिए । पुस्तक पढ़ने से पाठक को लेखक और संगठन के वास्तविक उद्देश्यों का ज्ञान होगा और उन्हें यह एहसास होगा कि यह हमारे राष्ट्र के इतिहास में सबसे अधिक गलत समझी गई पुस्तकों और संगठनों में से एक है । लेखक के दर्शन की गहरी समझ हमें उनकी सर्वसमावेशी विचारधारा और उसकी रक्षा के उनके उत्साह के बारे में बता सकती है । हिन्दी भाषी पाठकों के लिए गोलवलकर एवं आर–एस–एस विचारधारा को जानने एवं समझने के लिए यह पुस्तक काफी उपयोगी होगा ।
लेखक के बारे में
एम.एस. गोलवलकर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर–एस–एस) के दूसरे प्रमुख (सरसंघचालक), हिंदू राष्ट्रवाद के प्रमुख विचारक माने जाते हैं । उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा दी और अपनी पुस्तक ‘वी ऑर अवर नेशनहुड डिफाइंड’ के माध्यम से विचार प्रस्तुत किए, जबकि ‘बंच ऑफ थॉट्स’ उनके भाषणों का संकलन है । गोलवलकर को उनके अनुयायियों द्वारा आर–एस–एस के इतिहास में सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक माना जाता है । एक नए राष्ट्रवाद के अग्रदूत के रूप में, श्री गुरुजी ने अपने अद्वितीय व्यक्तित्व और कार्यों से राष्ट्रीय जीवन में एक अद्वितीय आंतरिक शक्ति का संचार किया











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