Description
इस पुस्तक में रामधारी सिंह दिनकरजी की ४० चालीस प्रमुख निबंधों का संकलन प्रस्तुत किया गया है, जो देशभक्ति, सामाजिक जागरण, व्यक्ति की मानसिक और आत्मिक स्वतंत्रता जैसे विषय प्रमुख रूप से देखने को मिलते हैं । दिनकरजी की समग्र निबन्ध संग्रह साहित्यिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है । इन निबंधों में देशभक्ति, समाज सुधार, मानवतावाद, और संघर्ष की भावना कूट–कूट कर भरी हुई है । उनकी समग्र की रचनाएँ न केवल साहित्यिक दृष्टि से उत्कृष्ट हैं, बल्कि वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वाली विचारधारा भी प्रस्तुत करती हैं । हमनें इस पुस्तक के मा/यम से दिनकरजी की सम्पूर्ण साहित्यिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का प्रयास किया है ।
अनुक्रमांक
दो शब्द
1. हिम्मत और जिन्दगी 1
2. चालीस की उम्र 5
3. ईर्ष्या, तू न गई मेरे मन से 11
4. हृदय की राह 16
5. कर्म और वाणी 20
6. खड्ग और वीणा 28
7. विजयी के आँसू 32
8. कला, धर्म और विज्ञान 38
9. भविष्य के लिए लिखने की बात 47
10. राष्ट्रीयता और अंतर्राष्ट्रीयता 57
11. हिन्दी कविता में एकता का प्रवाह 61
12. नेता नहीं, नागरिक चाहिए 69
13. भगवान बुद्ध 76
14. संस्कृति है क्या ? 83
15. भारत एक है 89
16. आमुख–अधनारीश्वर 97
17. मन्दिर और राजभवन 100
18. और चाहिए किरण जगत को और चाहिए चिनगारी 105
19. दीपक की लौ अपनी ओर 108
20. हड्डी का चिराग 112
21. महाकाव्य की वेला 115
22. कविता का भविष्य 121
23. नई कविता के उत्थान की रेखाएँ 131
24. अधनारीश्वर 145
25. शान्ति की समस्या 153
26. कलाकार की सफलता 158
27. आदर्श मानव राम 166
28. जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी 174
29. संस्कृति–संगम–1 180
30. संस्कृति–संगम –2 186
31. बौद्ध धर्म की विश्व–व्यापकता 191
32. आधुनिकता और भारत–धर्म 196
33. स्फुट चिन्तन 216
34. साहित्य पर विज्ञान का प्रभाव 225
35. साहित्य में आधुनिकता 236
36. परम्परा और भारतीय साहित्य 240
37. हमारी संस्कृति और आधुनिकता 246
38. विवाह की मुसीबतें 252
39. प्रेम एक है या दो ? 267
40. धर्म और विज्ञान 279











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