Description
About the Book
नागनन्दा, महाकवि हर्ष द्वारा रचित एक प्रमुख संस्कृत नाटक है, जो भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाती है । यह नाटक बौद्ध धर्म के तत्वों को समाहित करते हुए त्याग, करुणा और आत्मबलिदान की गहरी भावना को प्रस्तुत करता है । इस नाटक का केंद्रीय पात्र जिमूतवाहन है, जो नागों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देता है । यह नाटक हर्ष के साहित्यिक कौशल और धार्मिक सहिष्णुता का उत्कृष्ट उदाहरण है ।
नागानन्दा न केवल एक नाटक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धर्म और साहित्य का सम्मिलित रूप है । हर्षवर्धन ने इस नाटक के माधयम से त्याग, करुणा और धार्मिक सहिष्णुता की महत्वपूर्ण शिक्षाएँ दी हैं । यह नाटक आज भी पाठकों और दर्शकों को प्रेरित करता है और भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर के रूप में प्रतिष्ठित है ।
About the Author
हर्षवर्धन (606–647 ई.) भारतीय उपमहाद्वीप के एक महान सम्राट और संस्कृत साहित्य के प्रमुख रचनाकार थे । उन्होंने तीन प्रमुख नाटकों की रचना की: नागानन्दा, रत्नावली और प्रियदर्शिका । इन नाटकों में बौद्ध धर्म, शैव धर्म और संस्कृत नाट्यशास्त्र के तत्वों का मिश्रण देखने को मिलता है । हर्षवर्धनकी दरबार में बाणभट्ट जैसे महान साहित्यकारों का आगमन हुआ था, जो उनके साहित्यिक योगदान को और भी समृद्ध बनाते हैं ।











Reviews
There are no reviews yet.