Description
श्रीमद्भगवद् गीता केवल एक /ाार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के समग्र दर्शन का अमृत–स्रोत है । यह महाकाव्य महाभारत का एक अंश है, विशेषत% भीष्म पर्व का, जिसमें 700 श्लोकों के मा/यम से मानव जीवन के गूढ़तम प्रश्नों का समा/ाान प्रस्तुत किया गया है । यह संवाद है पुरुषार्थ और कर्तव्य के म/य खड़े मानव के अंतर्द्वंद्व का, और उस द्वंद्व को शांति एवं समत्व में रूपांतरित करने की दिव्य कला का । यह संवाद है योगेश्वर श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीचµजो वास्तव में हर युग के मानव और उसके अंतर्मन के बीच घटित होता है ।
श्रीमद्भगवद् गीता केवल एक /ाार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के समग्र दर्शन का अमृत–स्रोत है । यह महाकाव्य महाभारत का एक अंश है, विशेषत% भीष्म पर्व का, जिसमें 700 श्लोकों के मा/यम से मानव जीवन के गूढ़तम प्रश्नों का समा/ाान प्रस्तुत किया गया है । यह संवाद है पुरुषार्थ और कर्तव्य के म/य खड़े मानव के अंतर्द्वंद्व का, और उस द्वंद्व को शांति एवं समत्व में रूपांतरित करने की दिव्य कला का । यह संवाद है योगेश्वर श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीचµजो वास्तव में हर युग के मानव और उसके अंतर्मन के बीच घटित होता है । आशा है कि यह पुस्तक पाठकों को श्रीमद्भगवद् गीता का योग दर्शन समझने में उपयोगी सिद्ध होगा ।











Reviews
There are no reviews yet.