Description
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में शहीद भगत सिंह का नाम ऐसा तेजस्वी सितारा है, जिसकी चमक आज भी देशभक्ति, बलिदान और वैचारिक दृढ़ता के प्रतीक के रूप में हमारे सामने है । वे केवल एक क्रांतिकारी योद्धा ही नहीं थे, बल्कि एक विचारक, लेखक, दार्शनिक और सच्चे अर्थों में जननायक भी थे । आज भी जब हम “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा सुनते हैं, तो सबसे पहले जो चेहरा हमारी आँखों के सामने आता है, वह भगत सिंह का होता है । इस पुस्तक का उद्देश्य शहीद भगत सिंह के पत्रों के मा/यम से उनके क्रांतिकारी जीवन की तस्वीर को उकेरना है । हम देखेंगे कि कैसे एक युवक, जिसने किशोर अवस्था में ही देशभक्ति के भावों को आत्मसात कर लिया था, समय के साथ एक प्रखर चिंतक और क्रांति के वैचारिक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा । हम भगत सिंह को केवल एक वीर योद्धा के रूप में ही नहीं, बल्कि एक गहन विचारक, मानवतावादी और आ/ाुनिक राष्ट्र निर्माण के स्वप्नदृष्टा के रूप में भी समझें । उनके पत्र इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं कि वे हमें उनकी विचार/ाारा की गहराई, उनकी मानवीय संवेदनाओं, राजनीतिक चेतना और समय के साथ उनके वैचारिक विकास का परिचय कराते हैं ।











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